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बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ को चोकिंग होने पर कà¥à¤¯à¤¾ करें
कोई बाहरी चीज मà¥à¤‚ह में डालने से ही चोकिंग नहीं होती, बलà¥à¤•ि नवजात शिशà¥à¤“ं को सà¥à¤¤à¤¨à¤ªà¤¾à¤¨ के दौरान दूध से à¤à¥€ चोकिंग हो सकती है। दूध उनके गले में अटक जाता है, à¤à¤¸à¥‡ में नई मां तà¥à¤°à¤‚त घबरा जाती है। आपके साथ यदि à¤à¤¸à¤¾ हो तो उस सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿ से कैसे निपटना चाहिठजानिठइस आरà¥à¤Ÿà¤¿à¤•ल में। बता दें कि, बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ को चोकिंग की समसà¥à¤¯à¤¾ काफी आम देखी जाती है। आमतौर पर यह कोई बड़ी समसà¥à¤¯à¤¾ नहीं होती है, लेकिन गलत तरीके से किया गया उपचार या देखà¤à¤¾à¤² बचà¥à¤šà¥‡ के लिठगंà¤à¥€à¤° समसà¥à¤¯à¤¾ बन सकती है।
पहली बार मां बनने का à¤à¤¹à¤¸à¤¾à¤¸ बहà¥à¤¤ खास होता है। बचà¥à¤šà¥‡ के कोमल अंगों को सà¥à¤ªà¤°à¥à¤¶ करना, उसकी मीठी मà¥à¤¸à¥à¤•ान दिल को बहà¥à¤¤ सà¥à¤•ून देती है, लेकिन बचà¥à¤šà¥‡ को थोड़ी सी à¤à¥€ छींक आ जाठया शरीर गरà¥à¤® होने लगे तो मां तà¥à¤°à¤‚त घबरा जाती है। ये सब तो छोटी-मोटी समसà¥à¤¯à¤¾à¤à¤‚ हैं जो बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ के साथ होती ही रहती है, लेकिन बचà¥à¤šà¥‡ के गले में यदि दूध अटक जाठयानी बà¥à¤°à¥‡à¤¸à¥à¤Ÿà¤«à¥€à¤¡à¤¿à¤‚ग के दौरान यदि उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ चोकिंग हो जाठतो अधिकांश मांठघबराहट में समठही नहीं पाती कि कà¥à¤¯à¤¾ करें। à¤à¤¸à¥‡ में बचà¥à¤šà¥‡ को सही समय पर इलाज न मिलने से समसà¥à¤¯à¤¾ बढ़ सकती है। याद रखिठघबराने से समसà¥à¤¯à¤¾ हल नहीं होती, बलà¥à¤•ि बढ़ जाती है, इसलिठयदि कà¤à¥€ à¤à¤¸à¤¾ हो तो सयंम से काम लें और बचà¥à¤šà¥‡ को कंधे पर लिटाकर उनकी पीठथपथपाà¤à¤‚।
बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ को चोकिंग कà¥à¤¯à¥‹à¤‚ होती है
बà¥à¤°à¥‡à¤¸à¥à¤Ÿà¤«à¥€à¤¡à¤¿à¤‚ग के दौरान चोकिंग होना आम बात है। चोकिंग कई कारणों से हो सकती है। कà¥à¤› कारण बाहरी है जिसे रोका जा सकता है, जबकि कà¥à¤› नवजात की आंतरिक शारीरिक बनावट के कारण à¤à¥€ हो सकता है। यदि आपको यह लगता है कि बचà¥à¤šà¥‡ को बार-बार चोकिंग हो रही है तो डॉकà¥à¤Ÿà¤° से सलाह लेने की जरूरत है। वही आपको इसका कारण बता पाà¤à¤‚गे।
बाहरी कारण जिनकी वजह से चोकिंग हो सकती है उसमें शामिल है, सà¥à¤¤à¤¨à¤ªà¤¾à¤¨ के दौरान गलत पोजीशन में बचà¥à¤šà¥‡ को रखना, दूध का फà¥à¤²à¥‹ अधिक होना जिससे वह सीधे शिशॠके गले में चला जाता है। इस समसà¥à¤¯à¤¾ से निपटने के लिठबचà¥à¤šà¥‡ को दूध पिलाने से पहले थोड़ा सा दूध पंप करके निकाल लें या निपà¥à¤ªà¤² पर दबाव डालें। साथ ही फीड कराते समय बचà¥à¤šà¥‡ को सही तरीके से पकड़ना à¤à¥€ जरूरी है। और दूध पिलाने के बाद कंधे पर लेकर उनकी पीठथपथपाठजिससे बचà¥à¤šà¥‡ को डकार आती है।
कà¥à¤¯à¤¾ करें जब बचà¥à¤šà¥‡ को चोकिंग हो जाà¤
बचà¥à¤šà¥‡ के सिर पर सपोरà¥à¤Ÿ देते हà¥à¤ उठाठऔर अपने हाथ बचà¥à¤šà¥‡ की छाती पर रखें और उसे थोड़ा आगे की ओर à¤à¥à¤•ाà¤à¤‚। अब बंधी हà¥à¤ˆ मà¥à¤Ÿà¥à¤ ी बचà¥à¤šà¥‡ की नाà¤à¤¿ के ऊपर रखें और थोड़ा अंदर की ओर धकà¥à¤•ा दे। यह जलà¥à¤¦à¥€ और थोड़ा जोर से पेट की तरफ किया जाना चाहिà¤à¥¤
बचà¥à¤šà¥‡ को उलà¥à¤Ÿà¤¾ à¤à¥€ किया जा सकता है और चेसà¥à¤Ÿ पर थोड़ा दबाव देने के साथ ही पीठà¤à¥€ थपथपाà¤à¤‚ इससे à¤à¤¯à¤°à¤µà¥‡ खà¥à¤²à¥‡à¤—ा। चेसà¥à¤Ÿ पर बà¥à¤°à¥‡à¤¸à¥à¤Ÿà¤¬à¥‹à¤¨ के नीचे की तरफ 2-3 अंगà¥à¤²à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ से दबाव दें, इस दौरान बचà¥à¤šà¥‡ के सिर को दूसरे हाथ से सपोरà¥à¤Ÿ देते रहें।
कà¥à¤¯à¤¾ चोकिंग à¤à¤• आपातकालीन सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿
किसी समय बचà¥à¤šà¥‡ के मà¥à¤‚ह में कोई वसà¥à¤¤à¥ के अटकने के कारण सांस लेने की नली बà¥à¤²à¥‰à¤• हो जाती है। यदि सांस फेफड़ों के अंदर और बाहर जाने पर बà¥à¤²à¥‰à¤• होने लगती है तो मसà¥à¤¤à¤¿à¤·à¥à¤• में ऑकà¥à¤¸à¥€à¤œà¤¨ की कमी हो सकती है जिसके कारण यह à¤à¤• आपातकालीन सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿ का रूप ले लेती है।
शिशॠके चोकिंग करने पर उसे मदद की आवशà¥à¤¯à¤•ता तब पड़ती है जब वह –
बचà¥à¤šà¤¾ घबराया हà¥à¤† पà¥à¤°à¤¤à¥€à¤¤ हो
सांस लेने में दिकà¥à¤•त होना
शिशॠके हाफने या घरघराहट की वजह से
बचà¥à¤šà¤¾ बात नहीं कर पाटा या रोने लगता है
बचà¥à¤šà¥‡ का लंगड़ाना या बेहोश हो जाना
नीला पड़ना
अपने गले को पकड़ना या आपकी ओर हाथ हिलाना
इन परिसà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ में यदि आपको पता है कि कà¥à¤¯à¤¾ करना चाहिठतो तà¥à¤°à¤‚त à¤à¤¬à¥à¤¡à¥‹à¤®à¤¿à¤¨à¤² थà¥à¤°à¤¸à¥à¤Ÿ (पेट को दबाने) की पà¥à¤°à¤•à¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ शà¥à¤°à¥‚ करें। चोकिंग से बचाने का यह सबसे पà¥à¤°à¤¥à¤® उपचार होता है।
बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ को चोकिंग से कैसे बचाà¤à¤‚
सà¥à¤¤à¤¨à¤ªà¤¾à¤¨ के दौरान चोकिंग न हो इसके लिठआपको कà¥à¤› सावधानी बरतने की जरूरत है।
मिलà¥à¤• सपà¥à¤²à¤¾à¤ˆ को कम करें यानी बà¥à¤°à¥‡à¤¸à¥à¤Ÿ पर दवाब डालकर शरीर को यह कम दूध की आपूरà¥à¤¤à¤¿ का सिगà¥à¤¨à¤² à¤à¥‡à¤œà¤¾ जाता है। इसके लिठदाहिने हाथ की हथेली से दाहिने बà¥à¤°à¥‡à¤¸à¥à¤Ÿ के निपà¥à¤ªà¤² को रिबà¥à¤¸ की ओर दबाà¤à¤‚ और 5 तक गिनें। यह काउंटर पà¥à¤°à¥‡à¤¶à¤° जब कई बार बà¥à¤°à¥‡à¤¸à¥à¤Ÿà¤«à¥€à¤¡ से पहले दिया जाà¤à¤—ा तो शरीर को संकेत जाà¤à¤—ा कि बà¥à¤°à¥‡à¤¸à¥à¤Ÿ में दूध की आपूरà¥à¤¤à¤¿ नहीं करनी है।
हर बार फीडिंग के दौरान à¤à¤• ही तरफ के बà¥à¤°à¥‡à¤¸à¥à¤Ÿ से फीड करवाà¤à¤‚ ताकि वह पूरी तरह से खाली हो जाà¤à¥¤ इससे शिशॠका पेट à¤à¤° जाà¤à¤—ा और वह सà¥à¤¤à¤¨à¤ªà¤¾à¤¨ करना बंद कर देगा। आप ‘बà¥à¤²à¥‰à¤• फीडिंग’ à¤à¥€ करवा सकती है, इसमें à¤à¤• तरफ के बà¥à¤°à¥‡à¤¸à¥à¤Ÿ से कà¥à¤› घंटे के लिठफीड करवाया जाता है। इससे दूसरे बà¥à¤°à¥‡à¤¸à¥à¤Ÿ में दूध की सपà¥à¤²à¤¾à¤ˆ कम हो जाती है, जिससे अगली बार उस तरफ से दूध पिलाने पर à¤à¤•à¥à¤¸à¥à¤Ÿà¥à¤°à¤¾ दूध नहीं आà¤à¤—ा और चोकिंग की समसà¥à¤¯à¤¾ नहीं होगी।
यह सà¥à¤¨à¤¿à¤¶à¥à¤šà¤¿à¤¤ करें कि बचà¥à¤šà¤¾ ठीक तरह से बà¥à¤°à¥‡à¤¸à¥à¤Ÿ के पास टिका हà¥à¤† है और दूध पी रहा है। यदि शिशॠनिपà¥à¤ªà¤² को अचà¥à¤›à¥€ तरह से मà¥à¤‚ह में नहीं पकड़ता है तो दूध सीधे गले में जाने की बजाय उसके मà¥à¤‚ह में जमा होता जाता है, जिससे चोकिंग हो सकती है। जबकि यदि वह ठीक तरह से लैचिंग करता है तो दूध का फà¥à¤²à¥‹ गले में ठीक तरह से होता है और चोकिंग की समसà¥à¤¯à¤¾ नहीं होती।
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